सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं
💞 बड़ी सोच का बड़ा जादू 💞

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

💞 बड़ी सोच का बड़ा जादू 💞 मुट्ठी भर मेढकबहुत समय पहलेकी बात है किसी गाँव में मोहन नाम का एक किसान रहता था. वह बड़ा मेहनती और ईमानदार था. अपने अच्छेव्यवहार के कारण दूर-दूर तक लोग उसे जानतेथे और उसकी प्रशंशा करते थे. पर एक दिन जब देर शाम वहखेतों से काम कर लौट रहा था तभी रास्ते में उसने कुछलोगों को बाते करते सुना, वे उसी के बारे में बात कररहे थे.मोहन अपनी प्रशंशा सुनने के लिएउन्हें बिना बतायेधीरे-धीरे उनके पीछेचलने लगा,पर उसने उनकी बात सुनी तो पाया किवे उसकी बुराईकर रहे थे, कोई कह रहा था कि, “मोहन घमण्डी है.”, तो कोई कह रहा था कि,“सबजानते हैं वो अच्छाहोने का दिखावा करता है.”मोहन ने इससे पहले सिर्फ अपनी प्रशंशा सुनी थी परइस घटना का उसके दिमाग पर बहुत बुरा असर पड़ा और अब वह जबभी कुछ लोगों को बाते करतेदेखता तो उसे लगता वेउसकी बुराई कर रहे हैं. यहाँ तक कि अगर कोई उसकी तारीफ़ करता तो भी उसे लगता कि उसका मजाक उड़ाया जा रहा है. धीरे-धीरे सभी ये महसूस करने लगे कि मोहन बदल गया है, और उसकी पत्नी भी अपने पति के व्यवहार में आये बदलाव सेदुखीरहने लगी और एक दिन उसनेपूछा,“आज-कल आप इतने परेशान क्यों रहते हैं ;कृपयामुझे इसका कारण बताइये.”मोहन ने उदास होते हुए उस दिन कीबात बता दी. पत्नी को भी समझ नहीं आया कि क्या किया जाए पर तभी उसे ध्यान आयाकि पास के ही एकगाँव में एक सिद्धमहात्मा आये हुए हैं, और वो बोली,“स्वामी, मुझे पता चला है कि पड़ोस के गाँव में एक पहुंचे हुए संत आये हैं । चलिये हम उनसेकोई समाधान पूछतेहैं.”अगले दिन वे महात्मा जी के शिविरमें पहुंचे. मोहन ने सारी घटना बतायी और बोला, महाराज उस दिन के बाद से सभी मेरीबुराई और झूठी प्रशंशा करते हैं, कृपया मुझे बताइये कि मैं वापस अपनी साख कैसे बना सकता हूँ !”महात्मा मोहन कि समस्या समझ चुके थे.“पुत्र तुम अपनी पत्नी को घर छोड़ आओ और आज रातमेरे शिविर में ठहरो.”, महात्मा कुछ सोचते हुए बोले. मोहन ने ऐसा ही किया, पर जब रात में सोने का समयहुआ तो अचानक ही मेढ़कों के टर्र-टर्र की आवाज आने लगी.मोहन बोला, “ये क्यामहाराज यहाँ इतनाकोलाहल क्यों है ?”“पुत्र,पीछे एक तालाब है, रात के वक़्त उसमेमौजूद मेढक अपना राग अलापने लगतेहैं !!!”“पर ऐसे में तो कोई यहाँ सो नहीं सकता ?,” मोहानने चिंता जताई।“हाँ बेटा, पर तुम ही बताओ हम क्याकर सकते हैं,हो सके तो तुम हमारीमदद करो”,महात्मा जी बोले.मोहन बोला, “ठीक है महाराज, इतना शोर सुनके लगताहै इन मेढकों की संख्या हज़ारों में होगी, मैं कल ही गांव से पचास-साठमजदूरों कोलेकर आता हूँ और इन्हेपकड़ कर दूर नदी में छोड़ आता हूँ.”और अगले दिन मोहन सुबह-सुबहमजदूरों के साथ वहाँपंहुचा, महात्मा जी भी वहीँखड़े सब कुछ देख रहे थे. तालाब जयादा बड़ा नहीं था, 8-10 मजदूरों ने चारोंऔर से जाल डाला औरमेढ़कों को पकड़ने लगे. थोड़ी देर की ही मेहनत में सारे मेढक पकड़ लिए गए.जब मोहन ने देखा कि कुल मिला कर 50-60 ही मेढक पकड़े गए हैं तब उसने माहत्मा जी से पूछा, “महाराज, कल रात तो इसमें हज़ारोंमेढक थे,भला आज वे सब कहाँ चले गए, यहाँ तो बस मुट्ठी भर मेढक ही बचे हैं.”महात्मा जी गम्भीर होते हुए बोले, “कोई मेढक कहीं नहीं गया, तुमने कल इन्ही मेढ़कोंकी आवाज सुनी थी, ये मुट्ठी भर मेढक हीइतना शोर कररहे थे कि तुम्हे लगा हज़ारों मेढक टर्र-टर्र कर रहे हों. पुत्र, इसी प्रकार जबतुमनेकुछ लोगों को अपनी बुराई करते सुना तो भी तुम यही गलती कर बैठे, तुम्हेलगा कि हर कोई तुम्हारीबुराई करता है पर सच्चाई ये है कि बुराई करने वाले लोगमुठ्ठी भर मेढक केसामान ही थे. इसलिए अगली बार किसी को अपनी बुराई करते सुनना तो इतना याद रखना कि होसकता है ये कुछ ही लोग हों जो ऐसा कर रहे हों, और इस बात को भी समझना कि भले तुम कितने ही अच्छे क्यों न हो ऐसे कुछ लोग होंगे ही होंगे जोतुम्हारी बुराई करेंगे।”अब मोहन को अपनी गलती का अहसास होचुका था,वहपुनः पुराना वाला मोहन बन चुका था.दोस्तों, मोहन की तरह हमें भीकुछ लोगों के व्यवहार को हर किसी काव्यवहार नहीं समझ लेना चाहिए और सकारात्मक नजरिये औरसोंच सेअपनी ज़िन्दगी जीनी चाहिए। हमकुछ भी कर लें पर जिंदगी में कभी ना कभी ऐसी समस्या आ ही जाती है जो रात के अँधेरे में ऐसी लगती है मानो हज़ारों मेढक कानमें टर्र-टर्र कररहे हों। पर जब दिन केउजाले में हम उसका समाधान करने का प्रयास करते हैं तो वहीसमस्या छोटी लगने लगती है. इसलिए हमें ऐसी स्थिति मेंघबराने की जगह उसकासमाधान खोजने का प्रयास करना चाहिए और कभी मुट्ठी भरमेढकों से घबराना नहींचाहिए.

💞 बड़ी सोच का बड़ा जादू 💞           मुट्ठी भर मेढक बहुत समय पहलेकी बात है किसी गाँव में मोहन नाम का एक किसान रहता था. वह बड़ा मेहनती और ईमानदार था. अपने अच्छेव्यवहार के कारण दूर-दूर तक लोग उसे जानतेथे और उसकी प्रशंशा करते थे. पर एक दिन जब देर शाम वहखेतों से काम कर लौट रहा था तभी रास्ते में उसने कुछलोगों को बाते करते सुना, वे उसी के बारे में बात कररहे थे. मोहन अपनी प्रशंशा सुनने के लिएउन्हें बिना बतायेधीरे-धीरे उनके पीछेचलने लगा,पर उसने उनकी बात सुनी तो पाया किवे उसकी बुराईकर रहे थे, कोई कह रहा था कि, “मोहन घमण्डी है.”, तो कोई कह रहा था कि,“सबजानते हैं वो अच्छाहोने का दिखावा करता है.” मोहन ने इससे पहले सिर्फ अपनी प्रशंशा सुनी थी परइस घटना का उसके दिमाग पर बहुत बुरा असर पड़ा और अब वह जबभी कुछ लोगों को बाते करतेदेखता तो उसे लगता वेउसकी बुराई कर रहे हैं. यहाँ तक कि अगर कोई उसकी तारीफ़ करता तो भी उसे लगता कि उसका मजाक उड़ाया जा रहा है. धीरे-धीरे सभी ये महसूस करने लगे कि मोहन बदल गया है, और उसकी पत्नी भी अपने पति के व्यवहार में आये बदलाव सेदुखीरहने लगी और एक...

💞 बड़ी सोच का बड़ा जादू 💞 सभी के अन्दर कोई ना कोई कमी होती हैबहुत समय पहले की बात है, किसी गाँव में एक किसान रहता था. वह रोज़ भोर में उठकर दूर झरनों से स्वच्छ पानी लेने जाया करता था. इस काम के लिए वह अपने साथ दो बड़े घड़े ले जाता था, जिन्हें वो डंडे में बाँध कर अपने कंधे पर दोनों ओर लटका लेता था. उनमे से एक घड़ा कहीं से फूटा हुआ था, और दूसरा एक दम सही था. इस वजह से रोज़ घर पहुँचते - पहुचते किसान के पास डेढ़ घड़ा पानी ही बच पाता था. ऐसा दो सालों से चल रहा था. सही घड़े को इस बात का घमंड था कि वो पूरा का पूरा पानी घर पहुंचता है और उसके अन्दर कोई कमी नहीं है, वहीँ दूसरी तरफ फूटा घड़ा इस बात से शर्मिंदा रहता था कि वो आधा पानी ही घर तक पंहुचा पाता है और किसान की मेहनत बेकार चली जाती है. फूटा घड़ा ये सब सोच कर बहुत परेशान रहने लगा और एक दिन उससे रहा नहीं गया, उसने किसान से कहा, “मैं खुद पर शर्मिंदा हूँ और आपसे क्षमा मांगना चाहता हूँ ?”क्यों ? किसान ने पूछा, “तुम किस बात से शर्मिंदा हो ?”“शायद आप नहीं जानते पर मैं एक जगह से फूटा हुआ हूँ, और पिछले दो सालों से मुझे जितना पानी घर पहुँचाना चाहिए था बस उसका आधा ही पहुंचा पाया हूँ, मेरे अन्दर ये बहुत बड़ी कमी है, और इस वजह से आपकी मेहनत बर्वाद होती रही है.” फूटे घड़े ने दुखी होते हुए कहा. किसान को घड़े की बात सुनकर थोडा दुःख हुआ और वह बोला, “कोई बात नहीं, मैं चाहता हूँ कि आज लौटते वक़्त तुम रास्ते में पड़ने वाले सुन्दर फूलों को देखो.” घड़े ने वैसा ही किया, वह रास्ते भर सुन्दर फूलों को देखता आया, ऐसा करने से उसकी उदासी कुछ दूर हुई पर घर पहुँचते – पहुँचते फिर उसके अन्दर से आधा पानी गिर चुका था, वो मायूस हो गया और किसान से क्षमा मांगने लगा.किसान बोला,” शायद तुमने ध्यान नहीं दिया पूरे रास्ते में जितने भी फूल थे वो बस तुम्हारी तरफ ही थे, सही घड़े की तरफ एक भी फूल नहीं था. ऐसा इसलिए क्योंकि मैं हमेशा से तुम्हारे अन्दर की कमी को जानता था, और मैंने उसका लाभ उठाया. मैंने तुम्हारे तरफ वाले रास्ते पर रंग -बिरंगे फूलों के बीज बो दिए थे, तुम रोज़ थोडा-थोडा कर के उन्हें सींचते रहे और पूरे रास्ते को इतना खूबसूरत बना दिया. आज तुम्हारी वजह से ही मैं इन फूलों को भगवान को अर्पित कर पाता हूँ और अपना घर सुन्दर बना पाता हूँ. तुम्ही सोचो अगरतुम जैसे हो वैसे नहीं होते तो भला क्या मैं ये सबकुछ कर पाता ?”,दोस्तों हम सभी के अन्दर कोई ना कोई कमी होती है, पर यही कमियां हमें अनोखा बनाती हैं. उस किसान की तरह हमें भी हर किसी को वो जैसा है वैसे ही स्वीकारना चाहिए और उसकी अच्छाई की तरफ ध्यान देना चाहिए, और जब हम ऐसा करेंगे तब “फूटा घड़ा” भी “अच्छे घड़े” से मूल्यवान हो जायेगा.

💞 बड़ी सोच का बड़ा जादू 💞 सभी के अन्दर कोई ना कोई कमी होती है बहुत समय पहले की बात है, किसी गाँव में एक किसान रहता था. वह रोज़ भोर में उठकर दूर झरनों से स्वच्छ पानी लेने जाया करता था. इस काम के लिए वह अपने साथ दो बड़े घड़े ले जाता था, जिन्हें वो डंडे में बाँध कर अपने कंधे पर दोनों ओर लटका लेता था. उनमे से एक घड़ा कहीं से फूटा हुआ था, और दूसरा एक दम सही था. इस वजह से रोज़ घर पहुँचते - पहुचते किसान के पास डेढ़ घड़ा पानी ही बच पाता था. ऐसा दो सालों से चल रहा था. सही घड़े को इस बात का घमंड था कि वो पूरा का पूरा पानी घर पहुंचता है और उसके अन्दर कोई कमी नहीं है, वहीँ दूसरी तरफ फूटा घड़ा इस बात से शर्मिंदा रहता था कि वो आधा पानी ही घर तक पंहुचा पाता है और किसान की मेहनत बेकार चली जाती है. फूटा घड़ा ये सब सोच कर बहुत परेशान रहने लगा और एक दिन उससे रहा नहीं गया, उसने किसान से कहा, “मैं खुद पर शर्मिंदा हूँ और आपसे क्षमा मांगना चाहता हूँ ?” क्यों ? किसान ने पूछा, “तुम किस बात से शर्मिंदा हो ?” “शायद आप नहीं जानते पर मैं एक जगह से फूटा हुआ हूँ, और पिछले दो सालों से मुझे जितना पानी घर पहुँचाना चा...

💞बड़ी सोच का बड़ा जादू💞 क्रोध त्यागना जरुरी है!By वनिता कासनियां पंजाब 🚩🌹🙏🙏🌹🚩 जापान के ओसाका शहर केनिकट किसी गाँव में एक जेन मास्टर रहते थे। उनकी ख्याति पूरेदेश में फैली हुई थी और दूर-दूर से लोग उनसे मिलने और अपनी समस्याओं का समाधान कराने आते थे।एक दिन की बात है मास्टर अपने एकअनुयायी के साथप्रातः काल सैर कर रहे थे कि अचानक ही एक व्यक्ति उनके पास आया औरउन्हें भला-बुराकहने लगा। उसने पहले मास्टर के लिए बहुत से अपशब्द कहे, पर बावजूद इसकेमास्टर मुस्कुराते हुएचलते रहे। मास्टर को ऐसा करता देख वह व्यक्ति और भी क्रोधित हो गयाऔर उनके पूर्वजों तक को अपमानित करने लगा। पर इसके बावजूद मास्टरमुस्कुराते हुएआगे बढ़ते रहे। मास्टर पर अपनी बातों का कोई असर ना होते हुए देखअंततः वह वयक्तिनिराश हो गया और उनके रास्ते से हट गया।उस वयक्ति के जाते ही अनुयायी नेआस्चर्य से पुछा,“मास्टर आपने भला उस दुष्ट की बातों का जवाब क्यों नहीं दिया, और तो और आप मुस्कुराते रहे,क्या आपको उसकी बातों से कोई कष्टनहीं पहुंचा ?”जेन मास्टर कुछ नहीं बोले और उसेअपने पीछे आने का इशारा किया।कुछ देर चलने के बाद वे मास्टर केकक्ष तक पहुँच गए।मास्टर बोले,“तुम यहीं रुको मैं अंदर से अभीआया।“मास्टर कुछ देर बाद एक मैले कपड़े लेकर बाहर आये औरउसे अनुयायी को थमाते हुए बोले, “लो अपने कपड़े उतारकर इन्हे धारण कर लो ?”

💞बड़ी सोच का बड़ा जादू💞 क्रोध त्यागना जरुरी है! By वनिता कासनियां पंजाब 🚩🌹🙏🙏🌹🚩 जापान के ओसाका शहर केनिकट किसी गाँव में एक जेनमास्टर रहते थे। उनकी ख्याति पूरेदेश में फैली हुई थी और दूर-दूर से लोग उनसेमिलने और अपनीसमस्याओं का समाधान कराने आते थे। एक दिन की बात है मास्टर अपने एकअनुयायी के साथप्रातः काल सैर कर रहे थे कि अचानक ही एक व्यक्ति उनके पास आया औरउन्हें भला-बुराकहने लगा। उसने पहले मास्टर के लिए बहुत से अपशब्द कहे, पर बावजूद इसकेमास्टर मुस्कुराते हुएचलते रहे। मास्टर को ऐसा करता देख वह व्यक्ति और भी क्रोधित हो गयाऔर उनके पूर्वजों तक को अपमानित करने लगा। पर इसके बावजूद मास्टरमुस्कुराते हुएआगे बढ़ते रहे। मास्टर पर अपनी बातों का कोई असर ना होते हुए देखअंततः वह वयक्तिनिराश हो गया और उनके रास्ते से हट गया। उस वयक्ति के जाते ही अनुयायी नेआस्चर्य से पुछा,“मास्टर आपने भला उस दुष्ट की बातों का जवाब क्यों नहीं दिया, और तो और आप मुस्कुराते रहे,क्या आपको उसकी बातों से कोई कष्टनहीं पहुंचा ?” जेन मास्टर कुछ नहीं बोले और उसेअपने पीछे आने का इशारा किया। कुछ देर चलने के बाद वे मास्...